'टीपू' को हीरो मानने वालों अपने 'सुल्तान' के पाप सुनो | Tipu Sultan Controversy

अंग्रेजों ने टीपू के इन दोनों मासूम बेटों को मद्रास में कैद करके रखा और जब 2 साल के अंदर टीपू ने अंग्रेजों को 3 करोड़ दे दिए, तब इसके बदले में दोनों बेटों को 1794 में अंग्रेजों ने रिहा कर दिया।

     हमारे देश की राजनीति इतनी अजीब है कि यहां मजहब के नाम पर खलनायक को भी किसी नायक की तरह पूजा जाता है। यह हमारे देश की विडंबना है कि कहीं औरंगजेब की कब्र पर फूल चढ़ाए जाते हैं तो किसी यूनिवर्सिटी में जिन्ना जैसे गद्दारों की तस्वीर लगाई जाती है। अब ताजा मामला मजहबी अत्याचारी हत्यारे मुस्लिम शासक टीपू सुल्तान से जुड़ा हुआ है। 
       इसलिए आज टीपू के इन नाजायज औलादो को उंसके सुल्तान का पूरा सच बताना बहुत जरूरी हो जाता है। आज जिहादियो के हरम में पैदा हुए जाहिलो को बताया जाएगा कि- 
  • कैसे टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों को ना केवल पत्र लिखा था बल्कि अपने दो छोटे-छोटे मासूम बेटों को अंग्रेजों के घर में बंधक भी रखवा दिया था। 
  • कैसे टीपू सुल्तान ने हजारों हिंदुओं का कत्ल किया और लाखों हिंदुओं को अपनी तलवार की नोक पर मुसलमान बनाया। 
  •  ना केवल हिंदू बल्कि ईसाइयों को भी कैसे टीपू सुल्तान ने हाथियों के पैरों से कुचलवाया था। 
  •  आखिर क्यों टीपू सुल्तान के जुल्मो सितम की वजह से दक्षिण भारत के कई ब्राह्मण 200 साल से दीपावली का त्यौहार नहीं मनाते हैं।  

टीपू ने अंग्रेजों से संधि और दो बेटों को बंधक बनाया

     अंग्रेजों और मैसूर सल्तनत के बीच चार बार युद्ध हुए। पहले दो युद्ध टीपू सुल्तान के पिता हैदरअली ने लड़े और तीसरा और चौथा युद्ध टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लड़ा। तो हम बात करते हैं ‘तीसरे एंग्लो मैसूर वॉर’ के बारे में जो 1790 से लेकर 1792 के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में टीपू सुल्तान की बुरी तरह से हार हुई थी। इस तीसरे युद्ध के अंत में जब अंग्रेज सेना ने टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगपट्टनम को घेर लिया था। तब टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के सेनापति गवर्नर लॉर्ड कॉर्नवालिस को एक पत्र लिखा था। 
   इस पत्र में टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से दोस्ती और शांति की गुहार लगाई थी। इस पत्र को लेफ्टिनेंट कर्नल मार्क विल्किस द्वारा 1810 में लिखित मशहूर पुस्तक “हिस्टॉरिकल स्केचेज़ ऑफ़ द साउथ ऑफ़ इंडिया, इन एन अटेम्प्ट टू ट्रेस द हिस्ट्री ऑफ मैसूर” में विस्तार के साथ उल्लेखित किया गया है। और लेफ्टिनेंट कर्नल मार्क विल्किस, टीपू सुल्तान के समकालीन थे। 
   आपको बता दूं कि कॉर्नवलिस को लिखे पत्र में टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से संधि करने की भी गुहार लगाई थी। जिसे अंग्रेजों ने स्वीकार किया। और इसके बाद जो संधि हुई, उसे इतिहास में ‘श्रीरंगपट्टनम संधि’ के नाम से जाना जाता है। आइए अब आपको बताते हैं कि अंग्रेजों के सामने टीपू सुल्तान ने किन-किन शर्मनाक शर्तों पर सरेंडर करने के लिए वो तैयार हो गया था। ।
तो 18 मार्च 1792 को हुई संधि के मुताबिक-
  1.  टीपू सुल्तान ने अपने राज्य का आधा हिस्सा अंग्रेजों को सौंप दिया था। 
  2.  इस संधि में टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों को 3 करोड़ का हरजाना देना स्वीकार किया। 
  3.  इस संधि के मुताबिक टीपू सुल्तान ने अपने दो बेटे 8 साल के अब्दुल खलिक और 5 साल के मोइनुद्दीन को अंग्रेजों को बंधकों के रूप में सौंप दिया। या यूं कहें कि संधि के तौर पर टीपू सुल्तान ने अपने दो मासूम बच्चे अंग्रेजों के सामने गिरवी रख दिया। 
इस संधि में टीपू सुल्तान ने यह वादा किया कि जब तक वो तीन करोड़ अंग्रेजों को नहीं दे देता है, तब तक बंधक के रूप में उसके दोनों बेटे अंग्रेजों के पास रहेंगे। अंग्रेजों ने टीपू के इन दोनों मासूम बेटों को मद्रास में कैद करके रखा और जब 2 साल के अंदर टीपू ने अंग्रेजों को 3 करोड़ दे दिए, तब इसके बदले में दोनों बेटों को 1794 में अंग्रेजों ने रिहा कर दिया। 
   जिस टीपू की शान में मक्कार देशद्रोही कसीदे पढ़ रहे हैं, उसने ना सिर्फ अंग्रेजों के सामने शांति की गुहार लगाते हुए पत्र लिखे थे बल्कि अपने दो मासूम बच्चों को उसने अंग्रेजों के पास बंधक यानी गिरवी ही रख दिया था और बाद में 3 करोड़ देकर उन्हें अंग्रेजों से छुड़वाया था। 

टीपू का उद्देश्य दारुउल इस्लाम बनाना 

   टीपू ने 18वीं शताब्दी में तलवार की नोक पर लाखों हिंदुओं को मुसलमान बनाया था। टीपू के बारे में मशहूर है कि वह हिंदुओं के सामने एक ही ऑप्शन रखता था ‘तलवार’ या ‘टोपी’। यानी इस्लामी टोपी पहनकर मुसलमान बन जाओ वरना तलवार से सर कटवा लो। टीपू का मकसद अपने राज्य को दारुउल इस्लाम बनाना था। और टीपू सुल्तान की इस सोच का सबूत मिलता है उसके ‘राजकीय घोषणा’ से! जिसे खुद टीपू सुल्तान ने लिखा था, जो एक तरह का संविधान होता है। और 3 मई 1786 को लिखे गए इस ‘राजकीय घोषणा’ का शीर्षक था ‘सरकार -ए-खुदाददा’ यानी खुदा द्वारा दी गई सरकार। 
    अपने इस घोषणा पत्र में टीपू सुल्तान ने जो लिखा है, उसे आप बहुत ध्यान से पढिये! वो लिखता है कि- 
   “हमारा यह अटल उद्देश्य है कि उन निकम्मे और जिद्दी काफिरों (हिन्दुओ) को, जिन्होंने सच्चे ईमान वालों (मुसलमानों) की आज्ञा को मानने से इंकार कर दिया है, उन्हें ईमान वालों (मुसलमानों) के हाथों दंडित किया जाएगा। उन्हें (काफिरों को) सच्चा मजहब स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जाएगा। खासतौर पर इस समय जब हिंद के राजकुमारों की मूर्खता के कारण इस अहंकारी जाति (हिंदू जाति) ने यह सोच बना ली है कि सच्चे ईमान वाले (मुसलमान) कमजोर और तुच्छ हो गए हैं।”
    तो यह थी टीपू सुल्तान की भाषा! और उसका संविधान! उसका घोषणा पत्र। और यहां तक कि टीपू टीपू सुल्तान ने खुद अपने लिखे पत्रों और दस्तावेजों में यह स्वीकार किया है कि ‘उसने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार किया और उनका जबरन धर्म परिवर्तन करवाया।’ इसलिए जो लोग टीपू के अत्याचारों को मनगढ़ंत बातें बताते हैं, उन्हें खुद टीपू के लिखे इन पत्रों को पढ़ना चाहिए। 
   टीपू ने अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए उस वक्त तुर्की के खलीफा को भी पत्र लिखा था। इस पत्र में टीपू ने यह स्वीकार किया था कि उसने किस तरह से काफिरों (हिंदुओं) पर जुल्मो सितम किया है। उस इस दौर के सबसे काबिल इतिहासकारों में से एक ‘विक्रम संपत’ से जानते हैं कि उनका इस बारे में क्या कहना है? आपको बता दें कि विक्रम संपत ने हाल ही में ‘टीपू सुल्तान’ पर एक बेस्ट सेलर पुस्तक भी लिखी है। 
विक्रम संपत बताते हैं कि “टीपू ने अपने ‘राजकीय घोषणा’ में लिखा है कि मेरे जो ‘सरकार खुदादाद’ है, उसका मुख्य उद्देश्य यही है कि हम काफिरों (हिन्दुओ) का खत्म करें। वहां टीपू ये नहीं बोल रहे हैं कि हम निजाम को भी हराना चाहते हैं। ये मुख्यतः काफिरों (जो उसके मजहब पर विश्वास नही करता उस) को खत्म करने बात कर रहा है।” 
विक्रम संपत आगे बताते है कि - “टीपू सुल्तान ने भारत से बाहर अफगान के शासक जमन शाह, पर्शिया के ऑटोमन खलिफ़ा को मजहब के आधार पर भारत बुला रहा था ताकि वो भारत आये और भारत पर आक्रमण करके लुटे। और उन्हें बता रहा था कि मुगल बादशाह शाह आलम, काफिर मराठा के नीचे राज कर रहा है। इसलिए शाह आलम अच्छा मुस्लिम नही है। मैंने बहुत से मंदिर, गिरजाघर तोड़े है। बहुत से काफिरो की हत्या किया औऱ उनको मुसलमान बनाया। इसलिए वो मुझे सच्चा मुसलमान समझे और मुझे हिंदुस्तान का बादशाह घोषित करे, और मैं इसमे मदद करूंगा। मैं इस सम्मान के लायक हूँ।”

टीपू सुल्तान ने इस्लाम के नाम पर खून की नदियां बहाया 

   मैसूर पर टीपू सुल्तान की हुकूमत 1782 से 1799 तक रही। इस दौरान उसने तमिलनाडु और केरल पर कई हमले किए। कई इतिहासकार मानते हैं कि इस दौरान उसने लाखों लोगों पर खूनी जुल्म किए और उन्हें मुसलमान बनाने के लिए मजबूर किया। खासकर टीपू ने केरल के मालाबार इलाके में मजहब के नाम पर खून की नदियां बहाया। इसका सबूत उन पत्रों से मिलता है, जो खुद टीपू सुल्तान ने अपने सेनापतियों को लिखा था। इन खतों के बारे में एक अंग्रेज अधिकारी विलियम किर्कपैट्रिक ने 1804 में एक किताब लिखी थी, जिसका नाम है सिलेक्टेड लेटर्स ऑफ टीपू सुल्तान। 
   इस किताब के मुताबिक 19 जनवरी 1790 को ‘बदरुज्जमा खान’ को एक पत्र में टीपू ने लिखा कि- “क्या तुम्हें पता है कि हाल ही में मैंने मालाबार पर एक बड़ी जीत दर्ज की है और 4 लाख से ज्यादा हिंदुओं को मुसलमान बनाया है। मैंने तय कर लिया है कि इस त्रावनकोर के राजा ‘मरदूद रमन नायर’ के खिलाफ जल्द हमला बोलूंगा। क्योंकि उसे और उसकी प्रजा को मुसलमान बनाने के ख्याल से मैं बेहद खुश हूं। इसलिए मैंने अभी श्रीरंगपट्टनम वापस जाने का विचार छोड़ दिया है।” 
  तो ये टीपू के ऐसे जाने कितने दर्जनों पत्र बताते हैं कि उसने हिंदुओं को किस तरह से तलवार की नोक पर मुसलमान बनाया और हिंदुओं के खून से नदियां बहाई। 

मेलुकोटे गाँव मे दीवाली क्यो नही मनाई जाती है   

   अब आपको टीपू सुल्तान की क्रूरता की एक ऐसी कहानी सुनाते हैं, जिसे सुनकर आपको विश्वास ही नहीं होगा! क्या आपको पता है कि आज भी बेंगलुरु से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘मांडिया’ जिले के ‘मेलूकोटे’ गांव में हर साल दिवाली पर अंधेरा रहता है। आज भी पिछले 200 साल से यहां पर दिवाली नहीं मनाई जाती है। जानते हैं क्यों? क्योंकि टीपू सुल्तान के शासनकाल में इस गांव के रहने वाले मांडयम आयंगर ब्राह्मण दीपावली का त्यौहार मनाने के लिए श्री रंगपट्टनम शहर में नरसिंह मंदिर में एकत्र हुए थे। टीपू सुल्तान ने इन काफिरों की हत्या करने के लिए ठीक दिवाली के दिन इसी मंदिर के अंदर जंगली हाथी छोड़ दिया और दरवाजे बंद करवा दिए। 
   टीपू के आदेश पर हुए इस नरसंहार में 700 से ज्यादा आयंगर ब्राह्मणों को मार डाला गया था। तब से ही इस दिन मांडयम आयंगर समुदाय दिवाली का त्यौहार नहीं मनाता है। तो ये हैं टीपू सुल्तान के किस्से जो उसने हिंदुओं पर अत्याचार के रूप में किए थे। 
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