नारी अधिकारों की तुलना: बाइबिल, कुरान और मनुस्मृति में नारी की स्थिति

नारी अधिकारों की तुलना: बाइबिल, कुरान और मनुस्मृति में नारी की स्थिति

    आज महर्षि मनु को नारी विरोधी बताया जा रहा है। मुस्लिम उलेमा कहते हैं कि कुरआन में औरत का दर्जा ऊँचा है! आइए तुलनात्मक रूप से देखें! 
"बाइबल और कुरआन दोनों ही महिला की कीमत पुरुष से लगभग आधी है!" 

यहाँ बाइबल का क्या कहना है।- (सन्दर्भ लैव्यव्यवस्था 27: 3-7 )

  • और तेरा अनुमान पुरुष के बीस वर्ष से लेकर साठ साल की उम्र तक का होगा, यहां तक ​​कि तेरा अनुमान पचास शेकेल चांदी का होगा और अगर यह एक महिला है, तो तेरा अनुमान तीस शेकेल होगा। 
  • और यदि यह पाँच वर्ष से लेकर बीस वर्ष की आयु तक भी हो, तो तेरा अनुमान पुरुष के बीस शेकेल और स्त्री के दस शेकेल के लिए होगा।
  • और यदि यह एक महीने की उम्र से लेकर पाँच साल की उम्र तक का है, तो तेरा अनुमान पुरुष के पाँच शेकेल चाँदी का होगा, और मादा के लिए तेरा अनुमान चाँदी के तीन शेकेल का होगा।
  • और अगर यह साठ साल की उम्र और ऊपर से हो; यदि वह नर है, तो तेरा अनुमान पंद्रह शेकेल और मादा दस शेकेल के लिए होगा।”
    (तो, उनकी उम्र के आधार पर, महिलाओं का मूल्य 1/2 से 2/3 है, जितना कि पुरुषों में)

कुरान क्या कहता है?

  • “अल्लाह तुम्हारी सन्तान के विषय में तुम्हें आदेश देता है कि दो बेटियों के हिस्से के बराबर एक बेटे का हिस्सा होगा; और यदि दो से अधिक बेटियाँ ही हो तो उनका हिस्सा छोड़ी हुई सम्पत्ति का दो तिहाई है। और यदि वह अकेली हो तो उसके लिए आधा है।” (कुरान 4:11)
  • “अगर कोई ऐसा शख्स मर जाए कि उसके न कोई लड़का बाला हो (न मॉ-बाप) और उसके (सिर्फ) एक बहन हो तो उसका तर्के से आधा होगा।”  ( कुरान 4: 176)
   और कुरान बताता है कि हमें एक महिला की गवाही पर कितना भरोसा करना चाहिए: यह एक आदमी के आधे लायक है।
  • “अपने लोगों में से जिन लोगों को तुम गवाही लेने के लिये पसन्द करो (कम से कम) दो मर्दों की गवाही कर लिया करो फिर अगर दो मर्द न हो तो (कम से कम) एक मर्द और दो औरतें (क्योंकि) उन दोनों में से अगर एक भूल जाएगी तो एक दूसरी को याद दिला देगी!” (कुरान 2: 282)

मनुस्मृति में नारी जाति

  • “पिता, भाई, पति या देवर को अपनी कन्या, बहन, स्त्री या भाभी को हमेशा यथायोग्य मधुर-भाषण, भोजन, वस्त्र, आभूषण आदि से प्रसन्न रखना चाहिए और उन्हें किसी भी प्रकार का क्लेश नहीं पहुंचने देना चाहिए।” (मनुस्मृति 3/55)
  • “अर्थात जिस समाज या परिवार में स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां देवता अर्थात् दिव्यगुण और सुख़- समृद्धि निवास करते हैं और जहां इनका सम्मान नहीं होता, वहां अनादर करने वालों के सभी काम निष्फल हो जाते हैं।” (मनुस्मृति 3/56)
  • “जिस कुल में स्त्रियां अपने पति के गलत आचरण, अत्याचार या व्यभिचार आदि दोषों से पीड़ित रहती हैं। वह कुल शीघ्र नाश को प्राप्त हो जाता है और जिस कुल में स्त्री-जन पुरुषों के उत्तम आचरणों से प्रसन्न रहती हैं, वह कुल सर्वदा बढ़ता रहता है।” (मनुस्मृति 3/57)
  • “जो पुरुष, अपनी पत्नी को प्रसन्न नहीं रखता, उसका पूरा परिवार ही अप्रसन्न और शोकग्रस्त रहता है और यदि पत्नी प्रसन्न है तो सारा परिवार प्रसन्न रहता है।”  (मनुस्मृति 3/62)
  • “पुरुष और स्त्री एक-दूसरे के बिना अपूर्ण हैं, अत: साधारण से साधारण धर्मकार्य का अनुष्ठान भी पति-पत्नी दोनों को मिलकर करना चाहिए।” (मनुस्मृति 9/96) 

पुत्र-पुत्री एक समान 

   आजकल यह तथ्य हमें बहुत सुनने को मिलता है। मनु सबसे पहले वह संविधान निर्माता है, जिन्होंने जिन्होंने पुत्र-पुत्री की समानता को घोषित करके उसे वैधानिक रुप दिया है- 
  • ‘‘पुत्रेण दुहिता समा’’ (मनुस्मृति 9/130) अर्थात्-पुत्री पुत्र के समान होती है।
  • पुत्र-पुत्री को पैतृक सम्पत्ति में समान अधिकार है। (मनुस्मृति 9/130, 9/192)
  • पुरुषों को निर्देश है कि वे माता, पत्नी और पुत्री के साथ झगडा न करें। (मनुस्मृति 4/180).
  • इन पर मिथ्या दोषारोपण करने वालों, इनको निर्दोष होते हुए त्यागने वालों, पत्नी के प्रति वैवाहिक दायित्व न निभाने वालों के लिए दण्ड का विधान है। (मनुस्मृति 8/274, 389,9/4)
   मनु की एक विशेषता और है, वह यह कि वे नारी की असुरक्षित तथा अमर्यादित स्वतन्त्रता के पक्षधर नहीं हैं। और न उन बातों का समर्थन करते हैं जो परिणाम में अहितकर हैं। इसीलिए उन्होंने स्त्रियों को चेतावनी देते हुए सचेत किया है कि- 
  • “वे स्वयं को पिता, पति, पुत्र आदि की सुरक्षा से अलग न करें, क्योंकि एकाकी रहने से दो कुलों की निन्दा होने की आशंका रहती है। (मनुस्मृति 5/149, 9/5-6)
    इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि मनु स्त्रियों की स्वतन्त्रता के विरोधी है। इसका निहितार्थ यह है कि नारी की सर्वप्रथम सामाजिक आवश्यकता सुरक्षा की है। वह सुरक्षा उसे, चाहे शासन-कानून प्रदान करे अथवा कोई पुरुष या स्वयं का सामर्थ्य।
   उपर्युक्त विश्‍लेषण से हमें यह स्पष्ट होता है कि मनुस्मृति की व्यवस्थाएं स्त्री विरोधी नहीं हैं। वे न्यायपूर्ण और पक्षपातरहित हैं। मनु ने कुछ भी ऐसा नहीं कहा जो निन्दा अथवा आपत्ति के योग्य हो। 
नारी अधिकारों की तुलना: बाइबिल, कुरान और मनुस्मृति में नारी की स्थिति
मनुस्मृति को जाने!
    मनुस्मृति के विषय में प्रचलित भ्रांतियों को जानने के लिए डॉ विवेक आर्य द्वारा लिखित एवं मनुस्मृति भाष्यकार डॉ सुरेंद्र कुमार जी द्वारा संपादित पुस्तक “मनुस्मृति को जानें!” मूल्य : ₹150 रुपए। डाक खर्च सहित। पुस्तक खरीदने के लिए  नंबर  094855 99275  पर whatsapp करें।


Post a Comment

Previous Post Next Post